तीन घंटे आकाशीय मंडल में दिखेगा खंडग्रास चंदग्रहण का विशेष नजारा

पहली बार चंद्रग्रहण के साथ बनेगा ग्रहों का अद्भुत योग

मध्यरात्रि में दिखेगा 2 घंटे 59 मिनट की कुल समयावधि 

आषाढ़ी पूर्णिमा मंगलवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वैद्यृति योग के बीच गुरूपूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। मंगलवार पूर्णिमा होने से यह दिन विशेष फलदायी होगा। खास बात यह है कि इस दिन रात को चंद्रग्रहण का नजारा भी देखने को मिलेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित सोहनलाल जोशी के मुताबिक इस बार चंद्रग्रहण आषाढ़ी पूर्णिमा की रात को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में धनु राशि में शुरू होकर मकर राशि में खत्म होगा। इस ग्रहण से उत्तर भारत में उत्तरप्रदेश, पंजाब, कनार्टक, राजस्थान और मध्यप्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल भी हो सकती है। ग्रहण के समय धनु राशि में शनि, केतु, चंद्रमा, सूर्य के साथ राहु और मिथुन राशि में राहु के साथ सूर्य, शुक्र, रहेंगे। इस ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा चार विपरित ग्रह शनि, शुक्र, राहु, और केतु के बीच में रहेंगे। राहु और केतु के बीच में रहेंगे। वहीं मगल नीच का रहेगा ऐसा योग 149साल पहले 12 जुलाई 1870 को बना था।

शाम 4.31बजे सूतक शुरू

पंडित जोशी ने बताया कि ग्रहण का सूतक मंगलवार शाम 4.31 बजे से शुरू हो जाएगा। इससे पहले ही गुरूपूर्णिमा से संबधित पूजा पाठ कर लेना शुभ होगा। प्राचीन समय में इसी पूर्णिमा पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था तब से जंयती के मौके पर गुरू पूर्णिमा मनाई जाती है। 

मौसम में हुआ बदलाव

जोशी के मुताबिक ग्रहण रात 1.31 बजे प्रारंभ होगा। ग्रहण खत्म 4.30 बजे होगा। यह ग्रहण संपूर्ण भारत में दिखेगा। अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, यूरोप, दक्षिण अमेरिका सहित एशिया महाद्वीप के सभी देशों में दिखाई देगा।  

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