खाटलबाना में गरीब परिवार की बेटी ने किया जिले व गांव का नाम रोशन

पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में शिखा ने जीते कई गोल्ड मैडल

श्री गंगानगर । हिंदुमलकोट रोड पर स्थित गांव खाटलबाना में एक गरीब परिवार की बेटी शिखा कालड़ा जिसकी उम्र 22 साल है इस बेटी ने गांव में जिले का पावर लिफ्टिंग में चमका दिया है । मगर गनीमत यह की कोई संस्था व ग्राम पंचायत में इस बेटी को कहीं भी नाम तक नहीं लिया 16 साल की उम्र में पावर लिफ्टिंग के शोक ने शिखा ने  एक से बढ़कर एक मेडल की बहार ला दी। शिखा खाटलबाना में एक ड्राइवर की बेटी है इसके पापा महीने के 10 से 15000 ड्राइवरी कर मुश्किल से कमाते हैं। बेटी को सरकारी स्कूल में पढ़ाया । जिसके चलते इस बेटी ने जिले में राजस्थान का नाम रोशन किया गांव की बेटी नेशनल में टॉप टेन में सातवें नंबर कर रही ।6 बार राजस्थान राज्य स्तरीय पावर लिफ्टिंग में दो गोल्ड 5 सिल्वर मेडल जीते ,जिला स्तरीय में दोनों बार ही गोल्ड मेडल जीते ,13 मई को धौलपुर में पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता शिखा ने 390 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता।इस जीत के बाद शिखा कालड़ा को एमडी कॉलेज द्वारा निशुल्क एडमिशन दिया गया जिससे इस गरीब परिवार की बेटी है खेल के साथ पढ़ाई में भी सहायता मिली और मनोबल भी बढा।शिखा के पिता प्राइवेट वाहन चालक जो की बड़ी मुश्किल से घर का पालन पोषण करते हैं मगर शिखा को पढ़ाई में खेल में किसी तरह की कोई कमी नहीं आने दी । शिखा का परिवार में सादा खाना अभ्यास में इस बेटी की झोली में मेडलों की झड़ी लगा दी ।13 जून को जूनियर नेशनल पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में शिखा के घर की हालत इतनी खराब थी कि किराए के लिए पैसे तक नहीं थे। क्योंकि कुछ समय पूर्व ही शिखा के पिता ने पैसे जोड़ कर दो कमरे बनाये थे। जैसे तैसे शिखा के पिता ने बेटी को इस प्रतियोगिता में खेलने के लिए भेजा इसी दौरान सीखना राम चंद्रा कालड़ा ने कर्ज लेकर बेटी को खेलने भेजा वहां भी शिखा ने गोल्ड मेडल जीतकर खुशी और बढ़ा दी

गांव में अनेक समाज सेवी संस्थाएं लेकिन किसी ने नहीं की कोईं सहायता

रविवार 22 जुलाई को बीकानेर में आयोजित 39 में राजस्थान राज्य महिला पुरुष पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में शिखा ने 435 किलोग्राम वजन में गोल्ड मेडल जीतकर गांव व जिले का नाम रोशन किया । इस गांव में एक से बढ़कर एक समाज सेवी संस्थाएं हैं लेकिन इस बेटी की तरफ किसी ने ध्यान नही दिया क्योंकि गरीब की बेटी है जिसको अनदेखा किया गया। इस बेटी में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे गांव की नाम रोशन किया है शिखा ने बताया कि मैं घर पर ही अभ्यास करती हूं क्योंकि इसकी किट नही है मेरे पास न ही खरीद सकती हूं क्योकि 45से 50 हजार तक की आती है मगर परिवार की हालत नाजुक थी इसे खरीदना मुश्किल है। जैसे-तैसे घर पर भी अभ्यास करती हैं इसी अभ्यास से बेटी ने मैडल जीतकर लाना बड़ा ही आश्चर्यजनक है । बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के सरंक्षक डॉक्टर राज मेहरा व उपाध्यक्ष डॉ भूपेंद्र बराड़ शिखा कालड़ा का मनोबल बढ़ाने उनके घर पहुंचे  व 5100 नगद राशि व अन्य उपहार देकर समानित किया जिस से परिवार की खुशी और बढ़ गई। डाक्टर राज मेहरा ने शिखा को कहा कि आप इसी तरह से खेल में आगे बढ़ते जाएं हमारी तरफ से किसी भी प्रकार की कोई सहायता की जरूरत है  तो हम हमेशा आपके साथ हैं।


शिखा कालड़ा को आसपास के लोगो ने बेटी को बधाई दी और मुह मीठा करवाया ।शिखा ने बताया ली  उनके कोच मुकेश कुमार माता-पिता एवं के फूफा रामचंद्र बनाने के प्रयासों की बदौलत आज इस मुकाम पर पहुंची हूँ इससे मैं आज गांव का नहीं पूरे जिले का नाम भी रोशन करेंगे।

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