स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली से कलेक्टर असंतुष्ट

कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं अभियानों की प्रगति की समीक्षा के दौरान कार्ययोजना के अभाव, दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही एवं उदासीनता को देखते हुए समस्त विभाग का वेतन अग्रिम समीक्षा तक रोक दिया है। आपने कहा अगली समीक्षा में सकारात्मक परिणाम परिलक्षित होने पर ही वेतन के आहरण की अनुमति होगी। सुधार दृष्टिगत न होने पर अग्रिम कठोर अनुशासनात्मक कारवाई की जाएगी।

  कलेक्टर द्वारा बैठक में दस्तक अभियान, प्रसवपूर्व एवं प्रसव दौरान देखरेख, संस्थानिक प्रसव, पोषण पुनर्वास केंद्र के संचालन, ड़ेलिवरी स्तर-1,2 एवं 3 के संचालन की स्थिति, एम्बुलेंस सुविधा की उपलब्धता, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर मानकों, क्षय नियंत्रण कार्यक्रम, चर्म रोग निवारण अभियान, चिकित्सकों, आशा, एएनएम की उपलब्धता, संचारी एवं असंचारी रोगों की रोकथाम हेतु क्रियाशील कार्यक्रमों, प्रसूति सहायता योजना एवं आयुष्मान भारत योजना का क्रियान्वयन, दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम समेत अन्य प्रशासकीय विषयों की बृहद समीक्षा की गयी।

 कलेक्टर ने दस्तक अभियान में ज़िले की पिछड़ी स्थिति की वजह  स्क्रीनिंग में कोताही बरतने एवं निगरानी के अभाव को गम्भीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कृमि उन्मूलन अभियान के दौरान एनिमिया, सेप्सिस एवं ब्लड ट्रान्सफ़्यूज़न हेतु पुनः कार्य करने के निर्देश दिए हैं। आपने कहा कार्ययोजना के अभाव हेतु मैदानी अमले से अधिक ज़िला स्तरीय सम्बंधित अधिकारी ज़िम्मेवार हैं। नियमित रूप से निगरानी किसी भी अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण हैं। आपने कहा लोक स्वास्थ्य व्यवस्था के अंग के रूप में स्वास्थ्य अधिकारियों की ज़िम्मेदारी एक चिकित्सक से कहीं अधिक है। जो मैदानी अमले सौंपी गयी ज़िम्मेदारियों का भली भाँति निर्वहन नहीं कर रहे हैं उन्हें चिन्हित कर कार्यवाही करें एवं वैकल्पिक व्यवस्था प्रस्तावित करें। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है। विशेष अभियान हेतु सटीक प्रशिक्षण विधिवत कार्ययोजना एवं विभागीय सामंजस्य आवश्यक है। इस हेतु सेक्टर लेवल पर बैठकें करना एवं सम्बंधित विभागों को ससमय एवं सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी से अवगत कराना आवश्यक है।

जननी एवं नवजात मृत्यु दर की समीक्षा के दौरान मृत्यु के कारणो की रिपोर्ट उपलब्ध न होने पर कलेक्टर ने रोष व्यक्त करते हुए अगली समीक्षा तक सभी कारकों की विधिवत रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए हैं। आपने कहा बिना कारकों के चिन्हांकन के उपयुक्त प्रयास नही किए जा सकते आपने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को उक्त कार्य में कोई कार्यवाही न किए जाने हेतु डीपीएम एनएचएम को कारण बताओ नोटिस जारी कर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया।

 ऐसी सभी गर्भवती महिलायें जो हाई रिस्क हेतु चिह्नांकित हैं उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए सम्बंधित सेक्टर अधिकारी नियमित रूप से निगरानी रखें।इन सभी महिलाएँ के वर्तमान एवं अगली बैठक के बीच स्वास्थ्य मानकों के सुधार की रिपोर्ट की कलेक्टर स्वयं समीक्षा करेंगे। आपने कहा आँकड़ो कि संधारण पर्याप्त नही है, आँकड़ो का विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्ययोजना बनाना विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों का दायित्व है। उल्लेखनीय है स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ज़िले में 172 गर्भवती महिलाएँ हाई रिस्क ज़ोन में हैं।

प्रसूति सहायता योजना की पिछड़ी स्थिति में कलेक्टर ने कड़ी फटकार लगायी एवं 1 सप्ताह के अंदर पात्र हितग्राहियों तक हितलाभ पहुँचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आपने कहा किसी भी प्रकार की समस्या आने पर तुरंत सम्पर्क करें। प्रकरणो के अनावश्यक लम्बित रहने पर सम्बंधित अधिकारी दंड के भागी होंगे।

 सभी स्वास्थ्य केंद्र सक्रिय एवं क्रियाशील होने चाहिए अगर सेवा प्रदाय में किसी प्रकार की समस्या है अथवा किसी उपकरण की आवश्यकता या कोई प्रशासकीय समस्या है तो तुरंत अवगत कराएँ उनके समाधान हेतु उपाय किए जाएँगे कोई भी समस्या प्रस्तुत न करने एवं कार्य प्रभावित रहने पर सम्बंधित अधिकारी ज़िम्मेवार होंगे।

  बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बी॰डी॰सोनवानी, ज़िला टीकाकरण अधिकारी डॉ एसबी चौधरी, ज़िला क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ आर॰पी॰सोनी, डॉ द्विवेदी, डीपीएम एनएचएम समेत स्वास्थ्य विभाग विकासखंड स्तरीय अधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित थे।

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