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मैं हूं खाकी – दो परिवारों के बीच पिसता न्याय का भगवान, कागज की फाइलों में सिमटते परिवार, बेबस न्याय का भगवान

मैं हूं खाकी – दो परिवारों के बीच पिसता न्याय

सूरतगढ़ (प्रदीप कुमार) कहते है कि जीवन मे हर व्यक्ति के लिए हर दिन कुछ नया होता है। कुछ ऐसा